आज के लिए चंद रूमानी अशआर पेश हैं .... ज़रा बतलाइये कि.... ये क़लाम किसका है..?
१
ख़ुद,दिल में रह के आँख से परदा करे कोई
हाँ ,लुत्फ़ जब है पा के भी, ढूंढा करे कोई॥
या तो किसी को ज़ुर्रते दीदार ही न हो ,
या फिर मेरी निगाह से देखा करे कोई॥
तुमने तो हुक़्मे तर्क़े तमन्ना सुना दिया ,
किस दिल से आह तर्क़े तमन्ना करे कोई॥
२
हिज्रे जानां की घड़ी अच्छी लगी ।
अबके तन्हाई बड़ी अच्छी लगी ॥
एक तनहा फाख्ता उड़ती हुई ।
एक हिरन की चौकडी अच्छी लगी ॥
जिंदगी कि घुप अँधेरी रात में ।
याद की इक फुलझडी अच्छी लगी ॥
एक शहजादी मगर दिल की फ़कीर ।
उस को मेरी झोपडी अच्छी लगी ॥
३
ज़ख्मों- प -ज़ख्म झेले ,दाग़ॉं - प- दाग़ खाए।
यक क़तर खू़ने-दिल ने,क्या-क्या सितम उठाये॥
बढ़तीं नहीं पलक से , ता हम तलक भी पहुंचें।
फिरतीं हैं वो निगाहें ,पलकों के साये-साये ॥
कल की प्रविष्टि ये कौन शायर है ? के सही जवाब हैं ...
१. परवीन शाक़िर
२. बशीर बद्र
३. निदा फ़ाज़ली
४. ग़ालिब
५. जावेद अख्तर
मनीष कुमार को उनके चार सही जवाबों के लिए बधाई...
ज़रा पहचानिये ये क़लाम किस शायर का है...आज कोशिश की है कि बच्चों से मौजू ए सुखन हो...
१
जुगनू को दिन के वक्त आजमाने की जिद करें।
बच्चे हमारे अहद के चालाक हो गए ॥
२
जब देख के छुपते थे, अब देखते हैं छुप कर।
वो दौरे लड़कपन था, ये दौरे जवानी है॥
३
बच्चों के छोटे हाथों को चाँद सितारे छूने दो।
चार किताबें पढ़कर ये भी हम जैसे हो जायेंगे॥
४
बाजीचा ए अतफाल* है दुनिया मेरे आगे।
होता है शबो - रोज़ तमाशा मेरे आगे॥
*बच्चों का खेल
५
मुझको यकीं है सच कहती थी ,जो भी अम्मी कहती थी।
जब मेरे बचपन के दिन थे ,चाँद में परियां रहती थीं ।
आप टिपण्णी के ज़रिये उत्तर दे सकते हैं ....कुछ यों ही अदब की खिदमत सही...(सही उत्तर अगली प्रविष्टि में)
दीपक तिरुवा


aankhen hain ki phir mere dard kii hairat barasaa rahii hain ...har daphaa koun shikaston ko mere ghar kaa pataa detaa hai....?ye koun log hain ?jinake biich khulii huee aankhen gustaakh khidkiyaan hotii hain....mere bhiitar ke andhadon kii raphtaar , tootanon kaa vajn kuchh bhii libaas men nahiin rahataa....aur sach yakiinan inhiin hajaar jbaanon kii joothan hai jo syaahkhvaab tak ke bhiitar se tiir dar tiir jkhm ugalataa hai . aavaajen liye,...kufr....! qayamat....!tum kisii harajaaeen ke vaade ho phir bhii saare dinon ko mainne dar se baandh chhodaa hai ,bhounkane ke liye .....tumhen kudaa kii tamaam kismon kaa vaastaa...!aakar kisii roj meraa intajaar qatl kar do....








